मन का रेडियो, रिश्तों का गीत

टॉक शो के जरिए लोगों को प्यार का पाठ पढ़ानेवाले लव गुरु रेडियो जॉकी विवान का अपनी पत्नी से तलाक हो चुका है। उ
सके जीवन में अहम मोड़ तब आता है, जब …

मूवी : रेडियो
कलाकार : हिमेश रेशमिया , सोनल सहगल , शहनाज ट्रेजरीवाला।
निर्माता : रवि अग्रवाल ,
स्क्रिप्ट व डाइरेक्शन : ईशान त्रिवेदी।
सेंसर सर्टिफिकेट : यू
अवधि : 112 मिनट
हमारी रेटिंग :

ऐसा कम ही हुआ है जब किसी फिल्म ने रिलीज से पहले सिर्फ म्यूजिक के दम पर फिल्म की पूरी लागत वसूल ली हो। इस हफ्ते रिलीज हुई रेडियो ने यह कमाल कर दिखाया। करीब 6 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म के म्यूजिक से ही निर्माता ने अपनी लागत बटोर ली है। फिल्म के डायरेक्टर ईशान त्रिवेदी ने अपनी पिछली फिल्म साढ़े सात फेरे में टीवी चैनलों में टीआरपी बढ़ाने की होड़ में मानवीय रिश्तों के साथ खिलवाड़ को पेश किया था , इस बार उन्होंने महानगरों की लाइफ स्टाइल का हिस्सा बन चुके एफएम रेडियो स्टेशनों के आरजे की लाइफ स्टाइल पर फोकस किया है। गायक , संगीतकार के तौर पर पहचान बनाने के बाद हिमेश रेशमिया की इस फिल्म मे एक्टिंग देखकर लगता है अपनी आरजे की भूमिका के लिए उन्होंने अच्छी खासी तैयारी की।

कहानी
फिल्म की कहानी मेट्रो शहरों की लाइफ स्टाइल पर बेस्ड है। फिल्म में विवान शाह ( हिमेश रेशमिया ) रेडियो चैनल मिर्ची का स्टार आरजे है। विवान के पास पैसा कामयाबी सब कुछ है , अपने शो में दूसरों की मुश्किलों का हल खोजने वाले विवान की जिंदगी में कुछ भी ठीक नहीं है , विवान और उसकी बीवी पूजा तलवार ( सोनल सहगल ) के बीच दूरियां ऐसी बढ़ती हैं कि कि नौबत तलाक तक पहुंची। इन दोनों के बीच रिश्तों में खटास विवान की तेज रफ्तार से भागती लाइफ स्टाइल है और पूजा का करियर में अपना सही मुकाम हासिल न कर पाने की कुंठा से ज्यादा और कुछ नहीं था।

तलाक के बाद भी पूजा और विवान के बीच दोस्ती का रिश्ता पूरी तरह से टूटा नहीं था। इस बीच विवान की सूनी जिंदगी में शनाया ( शहनाज ट्रेजरीवाला ) सुखद हवा के झोंके की तरह आती है। चंद मुलाकातों में हुई कुछ तकरार के बाद विवान को शनाया की आंखों में अपने लिए प्यार दिखाई देता है। विवान पूजा से शनाया की बातें शेयर करता है और उसे लगता है कि अब उसे शनाया के साथ एक नई जिदंगी शुरू करनी चाहिए। ऐसे में एक्स वाइफ पूजा और शनाया में अपने सच्चे प्यार को तलाशते विवान की इस लव स्टोरी का क्लाइमेक्स आम हिंदी फिल्मों से डिफरेंट है। लव और म्यूजिक की इस कहानी के बीच झंडू लाल त्यागी ( परेश रावल ) की जब भी एंट्री होती है , हॉल में हंसी के ठहाकों की आवाज सुनाई देती है।

फिल्म का बड़ा प्लस पॉइंट इसका म्यूजिक भी है। मन का रेडियो , जिदंगी जैसे , एक रेडियो और पिया जैसे लडू मोतीचूर , दामाद जी गानों का फिल्मांकन अच्छा है। फिल्म के म्यूजिक से हिमेश ने साबित किया है कि मैलडी में उनका जवाब नहीं। एक्टिंग में हिमेश ने मेहनत की है जबकि परेश रावल खूब हंसाते हैं। इंटरवल से पहले कहानी थोड़ा स्लो है।

एक्टिंग
आपका सुरूर और कर्ज के मुकाबले हिमेश इस बार रोल में जमे है। फिल्म में उनकी एक्टिंग देखकर लगता है रेडियो जॉकी की भूमिका के लिए उन्होंने अच्छी खासी तैयारी की है। आरजे की लाइफ स्टाइल , रेडियो पर अपने शो को हिमेश ने दमदार अंदाज में पेश किया है। सोनल सहगल और शहनाज अपनी भूमिकाओं में ठीकठाक रहीं। छोटी सी भूमिका के बावजूद परेश रावल खूब जमे और हंसाने में कामयाब रहे।

स्क्रिप्ट , डाइरेक्शन
ईशान की स्क्रिप्ट में कुछ जगह ठहराव है , इसके बावजूद उन्होंने रेडियो जॉकी के वर्क स्टाइल और शोज पर अच्छी खासी रिसर्च की हैं इंटरवल से पहले कहानी सुस्त है , लेकिन क्लाइमैक्स रोचक है।

गीत , संगीत
हिमेश पर शुरू से नाक से गाने का इल्जाम लगता रहा है , लेकिन इस बार उन्होंने स्टाइल में चेंज किया है और गले से गाया है। गीतकार सुब्रत सिन्हा के लिखे गानों में नयापन और बोलों में ताजगी का एहसास लगता है। फिल्म के पांच गीत म्यूजिक चार्ट में लंबे अर्से से टॉप फाइव पर हैं।

क्यों देखें
रेडियो और आरजे को फोकस करती इस प्रेम त्रिकोण की कहानी में महानगरों में करियर , पैसा और कामयाबी की दौड़ में टूटते इंसानी रिश्तों को दमदार ढंग से पेश किया गया है।

कमजोर कड़ी
इंटरवल के बाद विवान का पूजा और शनाया के बीच सच्चे प्यार की कशमकश को कुछ ज्यादा खींचा गया है। झंडू लाल त्यागी बने परेश रावल का रोल थोड़ा ज्यादा होता तो बेहतर था।

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