पा में बिग बी का बिग कमाल

मूवी : पा
कलाकार : अमिताभ बच्चन , विद्या बालन , अभिषेक बच्चन , परेश रावल।
निर्माता : ए . बी . कॉरपोरेशन और रिलायंस बिग एंटरटेनमेंट।
स्क्रिप्ट , डायरेक्टर : आर . बाल्की
सेंसर सर्टिफिकेट : यू
अवधि : 140 मिनट

इस फिल्म को देखकर आपको लगेगा कि आप किसी नए अमिताभ बच्चन से मिल रहे हैं। वाकई , डाइरेक्टर आर . बाल्की ने इस बार उन्हें सिल्वर स्क्रीन पर कुछ ऐसे अलग अंदाज के साथ पेश किया है जो बिग बी की अपनी इमेज से कोसों दूर है। बाल्की इससे पहले सीनियर बच्चन के साथ लीक से हटकर फिल्म ‘ चीनी कम ‘ बना चुके हैं। करीब 70 साल के बिग बी ने सिल्वर स्क्रीन पर 12 साल के ऐसे बच्चे के चरित्र को जीवंत किया है जो एक लाइलाज बीमारी प्रोजोरिया से पीड़ित है। शायद ऐसा चैलेंज भरा रोल बॉलिवुड में अकेले अमिताभ बच्चन ही कर सकते है।

कहानी
फिल्म की कहानी एकदम हटकर है। विदेश में स्टडी के दौरान अमोल आप्टे ( अभिषेक बच्चन ) और विद्या ( विद्या बालन ) को कुछ मुलाकातों के बाद प्यार हो जाता है। एक राजनेता आप्टे साहब ( परेश रावल ) का इकलौता बेटा अमोल भी डैड की तर्ज पर राजनीति में मुकाम बनाना चाहता है तो विद्या डॉक्टरी की स्टडी को पूरा करने विदेश में है। अमोल और विद्या की नजदीकियां बिना किसी रिश्ते में बंधे एक ऐसे मुकाम पर पहुंच जाती है जहां विद्या अमोल के बच्चे की मां बनने वाली है। अमोल को करियर की इस दौड़ में फिलहाल किसी नए रिश्ते में बंधना मंजूर नहीं। वह विद्या को किसी डॉक्टर से मिलकर इस समस्या को समाप्त करने की सलाह देता है , लेकिन विद्या को ऐसा करना गवारा नहीं। वह अमोल की जिंदगी से निकल अपनी मां के पास आती है और अपने बच्चे को जन्म देती है। विद्या का यह बच्चा प्रोजोरिया नाम की लाइलाज बीमारी से पीड़ित है।

सिर्फ 12 साल की उम्र में 6 0 साल के बूढ़े जैसा दिखने वाला विद्या का बेटा ऑरो ( अमिताभ बच्चन ) दूसरे सामान्य बच्चों जैसा ही है। स्कूल में दूसरे बच्चों के साथ क्रिकेट खेलना और घर में नानी मां के साथ मौज मस्ती करना ऑरो की जिंदगी का हिस्सा है , लेकिन ऑरो को हर वक्त मन ही मन अपने पा की तलाश है। वहीं , दूसरी और अमोल अब एमपी बन चुका है। स्कूल में एक प्रतियोगिता के दौरान ऑरो की मुलाकात अमोल आप्टे से होती है जो स्कूल के कार्यक्रम में ऑरो को अवॉर्ड देते हैं। अमोल से मिलने के बाद ऑरो को उसमें अपनापन लगता है और दोनों एक दूसरे के नजदीक आते है , लेकिन ऑरो को अभी मालूम नहीं कि अमोल ही उसके पा है । फिल्म की कहानी का नयापन और पेश करने का रोचक अंदाज दर्शकों को बांधकर रखता है।

एक्टिंग
अमिताभ बच्चन का इस फिल्म में एक नया अवतार है। ऑरो की जिंदादिली और हर सही बात में बच्चों की तरह अड़ जाने वाले दृश्यों में अमिताभ का अभिनय कमाल का है। भले ही गजब के मेकअप ने बिग बी की राह आसान बना दी हो , लेकिन एक्टिंग से ऐसा कमाल सिर्फ बिग ही कर सकते है , कभी दर्शकों के चेहरों पर ऑरो की शरारतें हंसी बिखेरती तो कभी आंखें नम करती। अभिषेक सही मायने में एक यंग पॉलिटिशन लगे है वहीं विद्या बालन ऑरो की बेबस मां की भूमिका में खूब जमी है।

शुरू से आखिर तक फिल्म अमिताभ के इर्द गिर्द घूमती है और उन्होंने गजब की एक्टिंग की है। ऑरो के रोल में वह आपको हंसाते भी हैं और आंखें भी नम करते हैं। अभिषेक और विद्या बालन ने भी अच्छा रोल निभाया है।

स्क्रिप्ट , निर्देशन
आर . बाल्की की स्क्रिप्ट में दम है , कहानी की रफ्तार सुस्त है , लेकिन कहानी को आगे बढ़ाने के लिए ऐसा जरूरी था। ऐसा नहीं बाल्की ने पूरी फिल्म ऑरो के आसपास रखी अमोल और विद्या के चरित्रों के साथ भी उन्होंने पूरा न्याय किया है।

गीत – संगीत
फिल्म के गाने कहानी के मिजाज के अनुकूल है। इलैय्या राजा के संगीत में दम है। फिल्म का टाइटल सॉन्ग हिट हो चुका है। विद्या बालन और अभिषेक पर फिल्माया मुड़ी मुड़ी का फिल्मांकन गजब का बन पड़ा है।

क्या है खास
ऑरो की भूमिका में अमिताभ का कभी ना भूलने वाला अभिनय। कहानी अच्छी है , स्क्रिप्ट में दम है और यह कहीं भटकती नजर नहीं आती। फिल्म में कुछ भी फालतू नहीं है।

कमजोर कड़ी
एंटरटेनमेंट और वीकएंड पर मौज मस्ती की चाह में मसाला फिल्म देखने वालों के लिए कुछ नहीं। फिल्म थोड़ा गंभीर और लीक से हटकर है।

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