भोपाल त्रासदी को भूली सरकार, दूसरे देशों ने खोजे सुरक्षा के उपाय

03  दिसंबर, 2009
नई दिल्ली। औद्योगिक विकास के दौर में दुनिया के कई देश ऎसे है, जहां भोपाल जैसी त्रासदी का खतरा मंडरा रहा है। इन देशों में संभावित खतरे को देखते हुए बचाव के कदम बढ़ाने की मुहिम शुरू हो चुकी है। वहीं 25 साल पहले भयावह औद्योगिक त्रासदी का सामना करने वाली भोपाल का आरोप है कि गैस पी़डतों को आज भी बुनियादी सुविधाओं तक के लिए तरसना प़ड रहा है। इस दुखद त्रासदी ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था यूनियन कर्बाइड कारखाने से निकली जहरीली गैस से तीन हजार से ज्यादा लोगों ने दम तो़ड दिया था और पांच लाख से ज्यादा लोग बीमार प़ड गए थे।
भारत सरकार अपने एक शहर में ऎसा हादसा होने के बाद भी नहीं चेती है। आज भी गैस पी़डत इलाकों में पानी तक की उचित व्यवस्था नहीं है। गैस त्रासदी से बचे लोग प्रदूषित पानी के कारण बीमारियों के शिकार हो रहे है। भोपाल गैस त्रासदी की 25 बरसी पर राज्यसभा में पीडितों के प्रति बुधवार को संवेदना जताई गई। सभापति हामिद अंसारी ने कहा कि त्रासदी के घाव इससे प्रभावित लोगों और विकलांगता के साथ पैदा हुए बच्चों के रूप में आज भी हरे हैं। यह एक ऎसी मानवीय त्रासदी थीं जिससे पूरा विश्व स्तब्ध रह गया था। उन्होंने कहा कि आपराधिक मानवीय चूक के कारण 25 साल पहले हुए इस हादसे को लेकर आगामी वर्षो में जड रवैये के कारण स्थिति और जटिल हो गई। इस हादसे में कई लोगों की जान गई। जो लोग बच गए, उनकी हर संभव सहायता करना हम सबकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी हैं। पीडितों के मुआवजे के दावे तय समय सीमा में शीघ्रतापूर्वक निपटाए जाने चाहिए। 

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