भारत और कनाडा के बीच परमाणु करार

भारत में अपार संभावनाएं.कनाडा के प्रधान मंत्री स्टीफ़ेन हार्पर ने घोषणा की है कि परमाणु उर्जा के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत के साथ बातचीत संपन्न हो चुकी है. अब इस सिलसिले में दोनों देशों के बीच एक समझौता किया जाएगा.

त्रिनिदाद व टोबैगो की राजधानी पोर्ट ऑफ़ स्पेन में राष्ट्रमंडल शिखर सम्मेलन के दौरान बातचीत संपन्न हुई है. कनाडा के प्रधान मंत्री के कार्यालय से जारी किए गए एक वक्तव्य में कहा गया है कि ऐसे समझौते के फलस्वरूप भारत के असैनिक परमाणु उर्जा बाज़ार के साथ साझेदारी बढ़ेगी और कनाडा की कंपनियों को तेज़ी से बढ़ते विश्व की इस अर्थनीति में और सक्रिय होने का मौका मिलेगा. इस समझौते के बाद कनाडा के उद्यम भारत के साथ नियंत्रित रूप से परमाणु सामग्रियों, उपकरणों व तकनीक का आयात व निर्यात कर सकेंगे. सरकारी सूचनाओं के अनुसार परमाणु उर्जा व तकनीक के क्षेत्र में कनाडा के वार्षिक निर्यात का परिणाम लगभग 1 अरब 13 करोड़ डालर के बराबर है. अब भारत का असैनिक परमाणु क्षेत्र इस विशाल बाज़ार के साथ जुड़ पाएगा.

इस वर्ष के आरंभ में कनाडा के व्यापार मंत्री स्टॉकवेल डे ने सूचित किया था कि देश के सरकार नियंत्रित संस्थान ऐटमिक एनर्जी ऑफ़ कनाडा ने भारत के साथ नए परमाणु रिएक्टर के निर्माण के एक प्राथमिक अनुबंध पर हस्ताक्षर किया है. दोनों देशों के बीच समझौते के बाद ऐसी परियोजनाओं को हरी झंडी मिल जाएगी.

कनाडा के रिएक्टर से प्राप्त प्लुटोनियम का परमाणु हथियार के लिए इस्तेमाल के बाद 1974 में कनाडा ने भारत के साथ परमाणु सहयोग ख़त्म कर दिया था. नए समझौते को इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की दिशा में एक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है.

कनाडा आठवां देश है जिसके साथ भारत ने असैन्य परमाणु करार किया है. अमेरिका, रूस, फ्रांस, मंगोलिया, कज़ाखस्तान, अर्जेंटीना और नामीबिया के साथ भारत पहले ही करार कर चुका है.

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