द ग्रेट खली के गुरु डा. हस्तीर काफी निराश हैं खली से,

जालंधर : सन् 1994 में रामा मंडी में क्लिनिक चलाने वाले डा. रणधीर हस्तीर के पास 7 फुट ऊंचा एक नौजवान पहुंचा। नौजवान के पांव में फोड़ा हो गया था। डा. हस्तीर खिलाडि़यों और पुलिस के जवानों का इलाज करने के लिए जाने जाते थे। अपने क्लिनिक में आए युवक का इलाज करते हुए डा. हस्तीर ने उसके शरीर की बनावट देख कर जौहरी की तरह हीरे की पहचान कर ली, बस जरूरत थी उसे निखारने की। डा. हस्तीर ने उससे बाडी बिल्डिंग में अपना भाग्य आजमाने की बात कही और युवक के मानने पर डा. हस्तीर ने अपना सब कुछ झोंक कर उस युवक के शरीर को फौलाद बनाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह फौलाद ग्रेट खली बन विश्वविख्यात हो गया। लेकिन आज डा. हस्तीर काफी निराश हैं क्योंकि जिस युवक को फौलाद बना कर उन्होंने दुनिया पर छा जाने के लिए तैयार किया, वह युवक आज उनकी तरफ देखता भी नहीं है। द ग्रेट खली के बारे में सुनाते हुए डा. हस्तीर ने बताया कि जब खली उनके पास आया था तो उसका वजन महज 117 किलो था जो उसके शरीर के हिसाब से काफी कम था। उन्होंने कहा कि खली उनको गुरु मान चुका था तो उनकी जिम्मेदारी बनती थी कि उसे अलग पहचान दिलवाएं। उन्होंने बताया कि खली के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपने बारे में कुछ सोच पाता तो उसके सारे खर्च वहन का जिम्मा भी उन्होंने उठाया। उन्होंने बताया कि दिन-रात एक कर दिलीप सिंह का शरीर सौष्ठव बनाया और विदेशों में रहने और ट्रेनिंग का खर्चा भी उठाया। उन्होंने बताया कि 1999 में खली को पूरी तरह से तैयार कर डब्ल्यूडब्ल्यूई में खेलने लायक बना दिया। डा. हस्तीर ने बताया कि इस दौरान दिलीप सिंह खली ने एलपरो रेसलिंग, हेयवर्ड यूएसए के साथ तारा फिटनेस के तहत करार किया जो आज तक उनके पास है। 2006 में दिलीप सिंह उर्फ खली रेसलिंग में चला गया और द ग्रेट खली के नाम से मशहूर हो गया। उन्होंने बताया कि इसके बाद खली ने कांट्रेक्ट की बात तो दूर रही, गुरु शिष्य परंपरा को भी भूल गया और दोबारा उनकी तरफ मुड़ कर भी नहीं देखा। उन्होंने बताया कि कई लोगों ने उन्हें कहा कि करार को सबूत बना कर खली के खिलाफ केस करें लेकिन गुरु होने के नाते उनका मन कभी नहीं माना। उन्होंने बताया कि इस दौरान खली ने उनको 25 हजार रुपये दे करार खत्म करने की बात कही, लेकिन जिस शिष्य पर लाखों रुपये बर्बाद किए उससे ऐसे मजाक की आशा नहीं थी। उन्होंने बताया खली कभी उनको गुरु कह उनके चरण स्पर्श करता था और आज आसमान का चमकता सितारा बन उनको धूल भी नहीं समझ रहा। डा. हस्तीर ने कहा कि इसका उनको अफसोस नहीं है लेकिन इस बात अफसोस जरूर है कि दोबारा उनसे किसी शिष्य पर इतना भरोसा नहीं होगा।

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