आज रात आसमानी आतिशबाजी

मंगलवार की रात वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कुदरती आसमानी आतिशबाजी का नजारा देखने को मिलेगा। अमावस्या के दूसरी रात को होने जा रही इस (लियोनिड शावर) खगोलीय घटना में 400 उल्कापात प्रतिघंटा होने की संभावना है। पर्वतीय क्षेत्र, रेगिस्तान व खुले समुंदर से इस खगोलीय घटना का लुत्फ उठाया जा सकता है। भारतीय तारा भौतिकी संस्थान बंगलुरु के वैज्ञानिक प्रो. आरसी कपूर ने बताया कि 17 नवम्बर की आधी रात के बाद यह खगोलीय घटना होगी, जो तीन बजे से पांच बजे के बीच चरम पर रहेगी। इस घटना में 200 से 500 उल्कापात प्रति घंटा की रफ्तार से देखे जाने की संभावना है। भारत समेत नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान व अरब देशों में इस आसमानी आतिशबाजी का शानदार नजारा देखने को मिल सकता है। खगोल प्रेमियों समेत उल्कापात की घटनाओं पर शोधरत वैज्ञानिकों को इस घटना का बेसब्री से इंतजार है। अमावस्या की दूसरी रात होने के कारण आसमान घुप अंधेरे से घिरा रहेगा, जिसके चलते इस कुदरती आतिशबाजी को पिछले कुछ वर्षो की तुलना में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि पृथ्वी इन दिनों अपने कक्ष से होकर पूर्व में टेम्पलटन नामक पुल्छल तारे द्वारा छोड़े गये मलवे के करीब पहुंच रही है। इस कारण यह खगोलीय घटना होने जा रही है। प्रो. श्री कपूर ने बताया कि यूं तो पूरे वर्ष उल्कापात की घटनाएं होती हंै लेकिन कभी कभार ही इस तरह की स्थिति बन पाती है, जब उल्कापातों का मनमोहक नजारा देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि आकर्षक उल्कापात की आसमानी आतिशबाजी प्रत्येक 33 वर्ष में होती है। वर्ष 1933, 1966 व 1999 में हुई उल्कापात की घटनायें यादगार रहीं हैं। लियोनिड यानी सिंह राशि के तारा मंडल समूह पर होने जा रही इस आतिशबाजी को लियोनिड शावर के नाम से जाना जाता है।

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