मनसे का काला चिट्ठा


शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे ने शिवसेना में अपनी स्थिति एक मामूली क्लर्क जैसी होने और उद्धव ठाकरे से मतभेद के कारण जनवरी 2006 में पार्टी से त्यागपत्र दे दिया। द्य 9 मार्च, 2006 को उन्होंने मुंबई के शिवाजी पार्क में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी मनसे के गठन का ऐलान किया। द्य राज ने 19 मार्च, 2006 को घोषित किया कि मनसे भूमिपुत्र मराठी मानुष के अधिकारों की लड़ाई लड़ेगी। पर लड़ाई की दिशा कहीं और मुड़ गई। द्य मराठी बनाम गैर मराठी और हिंदी बनाम मराठी के नाम पर मनसे समर्थकों ने मुंबई सहित महाराष्ट्र के कई जगहों पर लगातार हिंसा की। द्य फरवरी, 2008 में मनसे समर्थकों ने शिवाजी पार्क, मुंबई में फरवरी समाजवादी पार्टी की रैली के दौरान जबर्दस्त उत्पात मचाया। चार दिन बाद महाराष्ट्र के अनेक भागों में हिंदी भाषी खोमचे वालों और दुकानदारों पर हमले किए। द्य 30 मई, 2008 को मुंबई में समाजवादी पार्टी की बैठक के दौरान तकरीबन 800 मनसे कार्यकर्ताओं ने हमला किया। द्य अक्तूबर 2008 में रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा देने गए हिंदी भाषी परीक्षार्थियों पर मनसे कार्यकर्ताओं ने कहर बरपाया। इस दौरान बिहार के एक युवक की मौत भी हो गई। द्य फरवरी 2008 में ठाणे के एक सिनेमा हाल पर मनसे कार्यकर्ताओं ने धावा बोल दिया। उन्हें वहां भोजपुरी फिल्म सैंया से सोलह सिंगार दिखाए जाने पर आपत्ति थी। द्य 5 फरवरी, 2008 को मनसे कार्यकर्ताओं ने उत्तर भारतीय कांग्रेसी नेता संजय निरूपम और भोजपुरी गायक मनोज तिवारी के कार्यालय पर पथराव किया। द्य मनसे के उत्पात से डर कर अकेले नासिक शहर से 15,000 हिंदी भाषी मजदूरों को पलायन करना पड़ा। द्य पुणे जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा में बताया गया कि मनसे के हमलों से घबराकर 25000 हिंदी भाषी मजदूर शहर छोड़ गए।

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