कहां से आई है यह जहरीली धंुध

जहरीला हुआ मौसम ..

सुबह आंख खुली तो चारों तरफ घनी धुंध नजर आई। बात कुछ चौंकाने वाली थी। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक जैसी स्थिति थी-ठंड तनिक भी नहीं, लेकिन धुंध घनी। कुछ लोगों ने इसे मौसम में अचानक बदलाव माना। लेकिन जब आंखों में जलन और सांस लेने में कुछ असहज महसूस हुआ तो अधिकांश लोगों के सामने सवाल कौंधा-कहीं यह जयपुर इंडियन आयल कारपोरेशन के टर्मिनल में आग से नौ दिनों तक उठते रहे धुएं के गुबार का असर तो नहीं है। बहरहाल वजह जो भी हो, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि यह धुंध जहरीली है, सेहत पर खतरनाक असर डालेगी और अन्य मुश्किलें भी बढ़ाएगी। गाजियाबाद में शनिवार को इसी धंुध की भेंट चढ़ गए रेलवे के पांच रेल कर्मी। देख न पाने के कारण जन शताब्दी से कट गए। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में धुंध ऐसी थी, जैसे धुएं के बादल छाए हुए हों। लोगों ने पहले तो इसे मौसम में बदलाव समझा। लेकिन दस बजे तक भी धुंध नहीं छंटी। इसके साथ ही लोगों को आंखों में जलन व सांस लेने में परेशानी भी महसूस हुई। दोपहर बाद तक आसमान में सूर्य की चमक बेहद फीकी रही। लोग इसे जयपुर अग्निकांड से जोड़कर देख रहे हैं। दिल्ली के जीटीबी अस्पताल प्रशासन के मुताबिक दर्जनों लोग आंखों में जलन की समस्या को लेकर पहुंचे, जबकि लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में भी करीब ढाई दर्जन लोग ऐसे ही थे। वेलकम आरडब्लूए के सदस्य शेखर ने बताया कि क्षेत्र में कई बुजुर्गो को सांस की तकलीफ सामने आई। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से लगे मेरठ के मोदीपुरम में शनिवार सुबह धुंध के बीच लोगों को सांस लेने में तकलीफ और जलन महसूस हुई। अलीगढ़ में भी शनिवार को धुंध रही लेकिन ठंड का कोई अहसास नहीं था। सांस लेने में जरूर थोड़ी दिक्कत महसूस हो रही थी। शहर के आगरा रोड, मथुरा रोड, जीटी रोड, दिल्ली रोड भी धुंध की चपेट में रहे। पंजाब में पिछले दो दिनों से छाई धुंध को लेकर लोग दहशतजदा हैं। उन्हें ऐसे हालात में तेजाबी बारिश का डर सता रहा है। गेहूं की बुवाई के लिए इसे ठीक नहीं माना जा रहा है। अमृतसर में दृश्यता (विजिबिलिटी) सबसे कम 50 से 200 मीटर तक आंकी गई। अमृतसर में मौसम विज्ञानियों ने आशंका जताई है कि धंुध का प्रकोप अगले तीन-चार दिनों तक बना रह सकता है। धंुध के कारण कई : जयपुर के इंडियन आयल कारपोरेशन के टर्मिनल (आईओसी) के 11 टैंकों में लगी आग भी हो सकती है धुंध की वजह। क्योंकि यहां से उठे धुएं के गुबार 30-40 किमी तक दूर से देखे जा रहे थे। पराली की आग : पराली यानी कटी फसल का खेत में मौजूद अवशेष। धान की फसल में इस्तेमाल किए गए कीटनाशकों में 33 फीसदी मात्रा में सल्फर व नाइट्रोजन मौजूद रहता है। इसके जला देने से यह वातावरण में घुल कर उसे जहरीला बना देता है। कार्बनडाईआक्साइड व कार्बन मोनो आक्साइ़ड की मात्रा बढ़ जाती है। सल्फर की मात्रा वायुमंडल में बढ़ने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं। -वाहनों और थर्मल प्लांट से निकलने वाला धुआं। इसलिए है घातक : धुंध में नाइट्रोजन आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड और एस्बेस्टस तत्वों और गैसों के रासायनिक कण होते हैं सेहत पर चोट : सांस लेने में तकलीफ, कफ, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, न्यूमोनिया, सिरदर्द, सीने में दर्द, फेफड़ों का कैंसर, आंख में जलन, श्र्वास नलिका में अवरोध, ध्यान केंद्रित न कर पाना, एलर्जी -धुंध के कारण शरीर में बैक्टीरिया और वायरस के संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है -अस्थमा के मरीज, वृद्ध और बच्चों पर ज्यादा असर कर सकते हैं बचाव -अधिक जल का सेवन करें -आंखों को बार-बार धोएं -धूम्रपान से करें परहेज -चश्मा पहनकर ही बाहर निकलें -प्रतिदिन दो बार खाने के बाद 10-20 ग्राम गुड़ का सेवन करें -सांस फूलने, आंखों में जलन की शिकायत होने पर तत्काल डाक्टर से संपर्क करें -विटामिन-ई का सेवन अधिक करें, जो गेहूं, चना, सब्जियों और वनस्पति तेल में पाया जाता है। यह प्रमुख रूप से कोशिकाओं पर होने वाले नुकसान को रोकता है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देता है।

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