खुलेआम बेचे जा रहे ऑटो के परमिट

राजधानी में चंद फाइनेंसरों ने ऑटो चालन पर कब्जा जमाया हुआ है। लेकिन परिवहन विभाग कुछ नहीं कर रहा है। विभाग को पता है कि किसी भी वाहन का परमिट निजी नहीं होता, उस पर सरकार का नियंत्रण होता है। इसकी खरीद-फरोख्त नहीं की जा सकती है। बावजूद इसके ऐसा हो रहा है। परिवहन विभाग ने इसको आरटीआई के जवाब में स्वीकार भी कर लिया है, पर कार्रवाई सिफर है। दूसरी ओर कुछ लोगों के पास 50-50 ऑटो रिक्शा हैं। आरटीआई के जवाब में यह जानकारी मिली है कि कृष्णानगर निवासी बल्लभ को। उन्होंने परिवहन विभाग से सूचना के अधिकार के तहत दी याचिका में कहा था कि अगस्त में समाचार पत्र दैनिक जागरण में प्रकाशित और टीवी चैनल में दिखाया गया था कि ऑटो डीलरों द्वारा ओपन स्कूटर मार्केट में एक ऑटो रिक्शा, जिसका कंपनी प्राइस लगभग 1,35,000 रुपए का ब्लैक में 4,70,000 में बेचा जा रहा है। उन्होंने पूछा था कि क्या परिवहन मंत्री, परिवहन मंत्री कार्यालय व परिवहन विभाग को इसकी जानकारी है। इसके साथ ही क्या जानकारी दी जाए कि क्या कार्रवाई की गई। परिवहन विभाग के उपायुक्त ने जवाब दिया कि चूंकि वाहनों की संख्या मांग से बहुत कम है इसलिए पुराने वाहन मालिक अपने ऑटो रिक्शा मनमानी कीमत पर बेच रहे हैं। इसमें परमिट की कीमत वाहन मालिकों द्वारा ली जा रही है। दिल्ली में ऑटो रिक्शाओं की संख्या बढ़ाने का मामला विचाराधीन हैं। कार्रवाई संबंधी सवाल को विभाग टाल गया। ध्यान देने वाली बात है कि कोई व्यक्ति खरीदी गई किसी गाड़ी को परमिट समेत बेच तो सकता है, लेकिन परमिट की खरीद-बिक्री नहीं कर सकता। राजधानी में 56,204 ऑटो रिक्शा पंजीकृत हैं। एक अन्य आरटीआई में याचिका दायर कर झील निवासी रमेश नागपाल ने पूछा था कि डीएल1आरके एवं डीएल1आरएल सिरीज के 0001 से 9999 तक ऐसे कितने ऑटो रिक्शा स्वामी हैं, जिनके पास 50 से अधिक ऑटो रिक्शा रजिस्टर्ड हैं। इसके जवाब में बताया गया कि कंप्यूटर द्वारा प्राप्त वांछित सूचना के अनुसार ऐसे 3,269 स्वामी हैं। हालांकि इनके पिता का नाम व पता भिन्न हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि ऐसे ऑटो स्वामियों की संख्या करीब 1000 है, जिनके पास 50 से ज्यादा ऑटो हैं। नागपाल के अनुसार एक ऑटो से एक दिन में न्यूनतम 300 रुपए की कमाई होती है। इस तरह अगर किसी के पास 50 ऑटो हैं तो वह साल में करीब 54 लाख रुपए कमा लेता है। लेकिन अधिकतर मालिक इन्कम टैक्स विभाग में सही कमाई के आधार पर टैक्स नहीं देते हैं। इस बारे में भी आरटीआई के माध्यम से परिवहन विभाग से पूछा गया था कि क्या विभाग ऐसे ऑटो मालिकों की जानकारी इन्कम टैक्स विभाग को देता है। इसके जवाब में विभाग ने कहा था कि हमारे यहां ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। विशेष बात यह है कि 50 से ज्यादा ऑटो रखने वालों में फाइनेंसरों की संख्या ही अधिक है।

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