एक हजार करोड़ स्वाह


ज्वालामुखी बने आयल डिपो में आग का तांडव जारी

जयपुर के सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में ज्वालामुखी बने आयल डिपो में अब तक लाखों लीटर तेल जल गया। इस तेल से एक लाख छोटे चौपहिया वाहन एक साल तक चलाए जा सकते थे। जयपुर में रोजाना दो लाख लीटर पेट्रोल और दस लाख लीटर डीजल खर्च होता है। इस हिसाब से छह महीने का पेट्रोल और एक माह का डीजल आग में खत्म हो गया। अब तक की पड़ताल में करीब एक हजार करोड़ के नुकसान की जानकारी मिली है। इसमें आयल का नुकसान पांच सौ करोड़ का और इतना ही सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इकाइयों एवं शिक्षण संस्थानों को आर्थिक नुकसान हुआ है। आग से 50 औद्योगिक इकाइयां और नौ कालेज तबाह हो गए हैं। इससे दस हजार लोगों के बेरोजगार होने की आशंका है। इनमें से अधिकांश इकाइयों के चालू होने में छह माह से एक साल तक का समय लग सकता है। आग पर काबू पाने में एक-दो दिन और लगेंगे : आग तीसरे दिन शनिवार को भी जलती रही। हालांकि आग की लपटें पहले से कुछ कम हुई हैं। पचास घंटे के प्रयास के बावजूद आयल डिपो में लगी आग नहीं बुझ पाई। इससे प्रशासनिक, इंडियन आयल कारपोरेशन (आईओसी) और सेना के अधिकारियों की चिंता बढ़ती जा रही है। टैंकों से निकल रही धुएं की लपटें दस-दस किमी दूर तक दिखाई दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टैंकरों में अभी बीस फीसदी ईधन बचा हुआ है इसलिए आग पर काबू पाने में एक-दो दिन और लग सकते हैं। तीन शव और मिले : शनिवार को आग की लपटें पहले के मुकाबले कुछ कम हुईं तो विशेषज्ञ डिपो के निकट पहुंचे। इस दौरान उन्हें तीन शव नजर आए। इसमें दो आईओसी के इंजीनियर के शव हैं। अब तक आठ लोगों के मरने की और सौ लोगों के घायल होने की पुष्टि की है। गर्मी से गल रहे तीन टैंक : विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के कारण तीन टैंक गल रहे हैं। अगर इनका गलना जारी रहता है तो टैंकों से पेट्रोल, डीजल का रिसाव हो सकता है। इससे आग एक बार फिर भड़क सकती है। इसलिए सेना के जवान टैंको से कुछ दूरी पर मिट्टी के गड्ढे खोद रहे हैं जिससे रिसने वाला ईधन इनमें चला जा। दस हजार परिवार अन्यत्र भेजे : डिपो से दस से पंद्रह किमी दूर तक के दस हजार परिवारों को अन्यत्र स्थानों पर भेज गया है। ये परिवार आश्रय स्थलों में ठहरे हुए हैं। दूर-दूर से बुलाए विशेषज्ञ : मथुरा और दिल्ली से आए विशेषज्ञ के साथ-साथ सेना के जवान, पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी आसपास जमे हुए हैं। जो आग की लपटें कम होते ही बचाव कार्य शुरू करने की तैयारी में हैं।

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