झींडा व छह साथी गुरु मर्यादा हनन के दोषी

अमृतसर( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
: हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एडहाक) के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा व उनके छह साथी कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक गुरुद्वारे की मर्यादा भंग करने के दोषी करार दिए गए हंै। श्री अकाल तख्त साहिब ने झींडा व उसके साथियों पर पंद्रह नवंबर के बाद पांच सिंह साहिबान की होने वाली बैठक तक फैसला सुरक्षित रख लिया है। श्री अकाल तख्त साहिब के इतिहास में पहली बार है कि धार्मिक दोषी तय करने के बावजूद पांच सिंह साहिबान ने मामला सुरक्षित रख लिया हो। श्री अकाल तख्त साहिब में दोषी पाए जाने के बाद तत्काल धार्मिक सजा का प्रावधान है। झींडा ने सिंह साहिबान द्वारा दिए गए फैसले को स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें जो भी धार्मिक सजा लगाई जाएगी, वह स्वीकार करेंगे। लेकिन हरियाणा कमेटी की मांग पर वह डटे हुए हंै। झींडा व उसके साथियों के साथ हरियाणा से भारी संख्या में संगत भी आई हुई थी। टास्क फोर्स के कर्मचारी मानव श्रृंखला बनाकर पूरी परिक्रमा में तैनात थे। झींडा व उनके छह साथियों को इसी परिक्रमा से होते हुए श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में पहुंचना पड़ा। हरियाणा से आई संगत ने इसका विरोध किया। छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी से संबंधित कुरुक्षेत्र के गुरुद्वारे में झींडा व उसके साथियों ने 13 सितंबर को कब्जा करने का प्रयास किया था। गुरु मर्यादा भंग करने के आरोप में श्री अकाल तख्त साहिब ने झींडा व उसके साथियों को श्री अकाल तख्त साहिब में तलब किया था। इस मामले की सुनवाई दो अक्टूबर को हुई थी। जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी। श्री अकाल तख्त साहिब ने इस मामले की जांच करवाई। बुधवार को पांच सिंह साहिबान की बैठक में जांच के निष्कर्ष को रखा गया। पांच सिंह साहिबान तख्त श्री पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह, तख्त श्री केस गढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी तरलोचन सिंह, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी बलवंत सिंह नंदगढ़ व हजूर साहिब के उप जत्थेदार ज्ञानी जतिंदर सिंह ने रिपोर्ट पर विचार-विमर्श के बाद झींडा व उनके छह साथियों को दोषी पाया। जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने पत्रकारों को बताया कि एसजीपीसी सदस्य झींडा, उसके साथी अवतार सिंह चक्कू, कंवलजीत सिंह अजराना, जोगा सिंह यमुनानगर व हजूर सिंह नंबरदार ने 13 सितंबर को कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक गुरुद्वारे में कब्जा कर सिख मर्यादाओं की घोर अवमानना की है। इन सभी को पंद्रह नवंबर के बाद आयोजित होने वाली पांच सिंह साहिबान की बैठक में धार्मिक दंड दिया जाएगा। ज्ञानी गुरबचन सिंह ने बताया कि एसजीपीसी का विभाजन कभी नहीं होने दिया जाएगा। अलग एसजीपीसी की मांग बेबुनियाद है। हरियाणा की कांग्रेस सरकार सिखों के धार्मिक मामलों में दखल न दें। शिरोमणि कमेटी हरियाणा के सिखों की सभी धार्मिक व सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा कर रही है। ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब जी के नाम की जायदाद किसी को बेचने का अधिकार नहीं है। कोलकाता में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के नाम के एक अस्थान को नानकसर कलेरा वालों को बेच दिया गया है। इस संदर्भ में कलेरावालों को निर्देश दिए गए है कि वहां पर संगत के लिए गुरुद्वारे का ही निर्माण किया जाए। श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जसविंदर सिंह के विरुद्ध प्राप्त हुई शिकायत के बारे में उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है। उसके बाद ही कोई निर्णय किया जाएगा।

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