किंग या किंग मेकर की भूमिका में होगी हजकां

( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-

विधानसभा चुनाव के लिए महज तीन दिन बाद मतदान होना है। मतदान के दिन वोटर किसको अपना समर्थन दें, मतदाता इसका सही फैसला तो आज शाम पांच बजे बंद हो रहे चुनाव प्रचार के बाद ही करेंगे। लेकिन इतना तय है कि चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा। त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति भी इतनी पेचीदा होगी कि हरियाणा जनहित कांग्रेस को किंग अथवा किंग मेकर की भूमिका निभानी होगी। कांग्रेस के विपक्षी दलों भाजपा, इनेलो व हजकां किसी भी सूरत में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं कर सकते। अब रही विपक्षी दलों की स्थिति इनेलो व भाजपा कांग्रेस को सत्ता से दूर करने के लिए पूरी जी-जान लगाए हुए हैं और इसका अंदाजा विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान के माध्यम से लगाया जा सकता है। ऐसे में ये लोग हजकां को बाहर से समर्थन देकर भी सरकार बनाने में नहीं चूकेंगे। ऐसा इन दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के बयानों से स्पष्ट हो गया है। इसके अतिरिक्त दूसरी स्थिति यह भी हो सकती है हजकां खुद किंग न बनकर किंग मेकर की भूमिका निभाए। किंग मेकर की भूमिका में भी यह तय है कि पार्टी अपने घोषणा-पत्र को लागू करवाने में सफल होगी और सरकार का संचालन करने में अपना मजबूत हस्तक्षेप रखेगी। प्रदेश की सभी सीटों पर चल रहे तिकोने और चौकोने मुकाबले से स्पष्ट हो गया है कि कोई भी एक दल सरकार नहीं बना पाएगा। ऐसे में दो दर्जन से अधिक सीटें जीतने की स्थिति में मौजूद हरियाणा जनहित कांग्रेस के समर्थन के बिना सरकार बनाना किसी भी दल के लिए आसान नहीं होगा। वर्तमान में पलवल से लेकर अंबाला तक और सिरसा से लेकर राई तक अधिकतर सीटों पर कांटे का मुकाबला है। मुकाबले में कौन सा उम्मीदवार आगे निकल जाए और कौन सा पिछड़ जाए यह कहना तो मुश्किल है। आदमपुर विधानसभा उपचुनाव व बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस हाईकमान को इस बात का मलाल था कि वह भरसक कोशिश के बाद भी हरियाणा से भजनलाल फेक्टर को कम नहीं कर पा रही है। अब विधानसभा चुनावों में भी भजनलाल फेक्टर कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी बन गया है। चौ. भजनलाल के नेतृत्व में बहुमत हासिल करने के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री बनाने के बाद से कांग्रेस के पैट नॉन-जाट वोटर की नाराजगी जग-जाहिर है। इस रोष व नाराजगी का सबूत हजकां की रोहतक रैली में दिख चुका है। इस रैली में चौ. भजनलाल द्वारा कुलदीप बिश्नोई को अपना राजनीतिक वारिस घोषित करके कुलदीप बिश्नोई को अप्रत्यक्ष रूप से हरियाणा के एकमात्र दमदार नॉन-जाट लीडर के रूप में स्थापित कर दिया। हालांकि विधानसभा चुनावों के लिए टिकट वितरण में जाट उम्मीदवारों को उचित तवज्जो देकर उन्होंने अपने आपको 36 बिरादरी के नेता के रूप में प्रदर्शित करने का काम किया लेकिन हजकां के वोट बैंक के रूप में फिर भी नॉन-जाट वोटर को ही देखा जा रहा है। हजकां द्वारा अपने घोषणा-पत्र में किए गए वायदे भी लोगों के लिए चर्चा का विषय बने हुए हैं। प्रत्येक परिवार ीि एक महिला व ओवरएज लोगों को 2000 रुपए मासिक भत्ता देने की घोषणा करके पार्टी ने प्रदेश के एक बहुत बड़े वोट बैंक को अपने साथ जोड़ लिया है क्योंकि महिलाओं और विशेषकर ओवरएज लोगों के हितों के लिए अभी तक किसी भी राजनैतिक दल ने कोई घोषणा नहीं की थी। इसके अतिरिक्त प्रदेश को बेरोजगारी मुक्त प्रदेश बनाने का लक्ष्य और बेरोजगारी की स्थिति में 2000 रुपए मासिक भत्ता दिए जाने, बेरोजगारों को दो लाख रुपए तक का कर्ज तीन साल के लिए बिना ब्याज मुहैया करवाने और छात्र संघ के चुनाव बहाल करने की घोषणा से हजकां ने प्रदेश के युवा वोट बैंक में अच्छी-खासी पैठ बना ली है। गरीबों को हर साल 50000 मकान मुफ्त देने और पिछड़े वर्गाे के लोगों को 100-100 गज के प्लाटों पर मकान बनाने की घोषणा से दलितों, बीपीएल परिवारों व पिछड़े वर्गो के मतदाताओं का झुकाव भी हजकां की ओर बढ़ा है। इस तरह से समाज के प्रत्येक वर्ग और परिवार के प्रत्येक सदस्य के कल्याण की योजनाओं को घोषणा-पत्र में शामिल किए जाने से पार्टी की पैठ हर घर तक बन गई है।

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