भजन की विरासत बढ़ा पाएंगे कुलदीप?


शुक्रवार का दिन। शाम के करीब सात बजे होंगे। मैं जैसे ही काली रावण गांव पहुंचा तो चौपाल पर बैठे कुछ लोग चुनाव की चर्चा में मशगूल दिखाई पड़े। इनमें कुछ दिहाड़ीदार थे तो कुछ चौधरी से दिखने वाले। सूबे सिंह हाल ही में हिसार से आदमपुर लौटा है। जलेबियों का लिफाफा उसके साथ में हैं। वह अपने घर भी नहीं गया और शामिल हो गया चुनाव की चर्चा में। मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के विकास के दावे से बात आरंभ हुई। जलेबी मुंह में रखते हुए मनबीर बोला, भाई..जलेबी बड़ी करारी है..आदमपुर तो चौधरी साहब का गढ़ है। इसमें सेंध लगाना इतना आसान नहीं है। आदमपुर का कोई परिवार ऐसा नहीं, जिस पर भजनलाल का अहसान न हो। अब चौधरी के अहसान का बदला चुकाने का समय आ गया है। सूबे सिंह ने बात आगे बढ़ाई। वह बोला, चौधरी की सेहत ठीक नहीं रहती। इसीलिए उन्होंने अपने बेटे कुलदीप को इस बार का चुनाव लड़वाया है। चुनाव के बाद कुछ चक्कर चला तो ठाठ उसी के होंगे। टक्कर तो कांग्रेस वाला जयप्रकाश (जेपी) भी खूब देगा, लेकिन भजनलाल परिवार का बाल भी बांका नहीं होगा। सदलपुर के राजबीर और कौली गांव के सुमेर चंद की मानें तो आदमपुर में कुलदीप बिश्नोई के परिवार की हुकूमत चलती हैं। इस हलके के लोगों ने अभी तक 12 चुनाव देखे हैं। इनमें दो उपचुनाव भी शामिल हैं। राजबीर बोला, 1986 में जब ताऊ देवीलाल के नाम की आंधी थी, उस समय भजनलाल ने आदमपुर से रिकार्ड जीत हासिल की थी। 1998 के उपचुनाव में कुलदीप बिश्नोई ने आदमपुर से 20 हजार और 2008 के उपचुनाव में भजनलाल ने 27 हजार मतों से जीत हासिल कर दूसरे दलों के लिए तमाम संभावनाएं खत्म कर दी हैं। धांसू गांव का प्रताप बोला, हुड्डा के सारे काम ठीक हैं। आदमी भी बढि़या है, लेकिन लोन माफ करने में थोड़ी गड़बड़ हो गई। प्रताप के मुताबिक कर्ज माफी योजना का लाभ उन लोगों को मिला जो डिफाल्टर हैं। जिन लोगों को लाभ चाहिए था, वह उससे वंचित रह गए। प्रताप ने चर्चा आगे बढ़ाई, बोला..इस बार के चुनाव में कोई मुद्दा नहीं है। बस हुड्डा ही मुद्दा है। लोग चाहते हैं कि हुड्डा की सरकार आए और बरवाला वाला जेपी भी यूं ही आगे बढ़ता जाए। खारिया के शमशेर सिंह और सीसवाल के रणदीप की राय कुछ अलग तरह की है। इनमें एक मास्टर है तो दूसरा सरकारी कर्मचारी। दोनों बोले, पूरे हरियाणा में सरकार चाहे किसी की भी आए, लेकिन आदमपुर में डंका कुलदीप का ही बाजैगा। धांसू के प्रताप को शमशेर की राय से थोड़ी तकलीफ हुई। वह बोला, चश्मे वाला राजेश गोदारा भी कमजोर नहीं है। वह भी कुलदीप को टक्कर देगा। जेपी भी मजबूत है। कुछ वोट कमल के फूल वाला पवन खारिया और कुछ हाथी वाला राजेश प्रजापत भी काटेगा। फिर..इलैक्शन इतना आसान कहां से रहा। खैरमपुर के सुदेश प्रजापत और दड़ौली के रामप्रताप सिंह की राय में आदमपुर के लिए जेपी नए कंडीडेट हैं। उन्हें बरवाला में टिकट नहीं मिला तो आदमपुर आ गए। नलवा की ही बात ले लो, वहां कुलदीप की मां जसमा देवी का इलैक्शन एकतरफा है। आदमपुर के 26 गांव नलवा में आ गए और 22 गांव बवानीखेड़ा के चले गए। ऐसे में आदमपुर में कुलदीप और नलवा में उनकी मां जसमा देवी के लिए कतई मुश्किल नहीं है। बालसमंद का जोगेंद्र बोला, भई, नलवा में कांग्रेस के प्रो. संपत का इलेक्शन भी जोर पकड़ रहा है। आने वाले दिनों में क्या रहेगा, अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन इतना जरूर मानना पड़ेगा, आदमपुर में कुलदीप व जेपी और नलवा में जसमा व संपत में कांटे की टक्कर है।

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