सभी दलों का जातिगत गुणा-भाग


( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
: चुनावी महाभारत में चुनावी दल और उनके उम्मीदवार जीत के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते। वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए जाति कार्ड खेलने से नहीं चूकते। हालांकि चुनाव आयोग ने चुनाव में जाति या मजहब के किसी भी प्रकार से प्रयोग करने पर पाबंदी लगा रखी है। पर फिर भी पूरे भारत की तरह हरियाणा में भी चुनाव जातिगत समीकरणों के आधार पर लड़ा जाता है। जातिगत समीकरणों के चलते कई को टिकट मिल जाता है और कई का टिकट कट जाता है। पूरे प्रदेश में सभी जातियों के प्रतिनिधित्व के आधार पर टिकटों का बंटवारा होता है। पर इतना जरूर है कि हरियाणा में कभी सार्वजनिक मंच पर कोई भी नेता किसी जाति विशेष की बात न करके 36 बिरादरी के साथ की ही बात करता है। हरियाणा की चुनावी राजनीति का एक पहलू जाट-गैर जाट के राजनीति का है। बाकी तमाम बातों के लिए यह भी देखा जाता है कि किसने कितने जाट प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। हरियाणा विधानसभा चुनाव 2009 में जहां इनेलो ने जाटों व सिखों को सबसे अधिक टिकटें थमाई हैं, वहीं कांग्रेस ने जाट, पंजाबी और ब्राह्मण प्रत्याशियों के बीच तालमेल बैठाया है। इनेलो ने 30 जाट व सात सिखों को टिकट दिया है। इनेलो के सिख प्रत्याशियों में जट्ट सिखों की भरमार है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने 27 जाट, सात ब्राह्मण, सात पंजाबी और दो सिखों को वोट दिया है। जाटों को टिकट देने में भाजपा व हजकां पीछे हैं। भाजपा ने 21 और हजकां ने 14 सीटें जाटों को दी हैं। पर हजकां व भाजपा ने ब्राह्मणों को जमकर टिकटें दी हैं। हजकां ने 14 ब्राह्मण व नौ पंजाबी और भाजपा ने 10 ब्राह्मण और नौ पंजाबियों को टिकट दिए हैं। हजकां ने तीन और भाजपा ने एक सिख को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस, इनेलो, हजकां तीनों ने पांच-पांच अहीर प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं जबकि भाजपा ने चार अहीर प्रत्याशी बनाए हैं। बहुजन समाज पार्टी की मौजूदगी में इस बार राजनीतक दलों ने आरक्षित सीटों पर प्रत्याशी चयन में विशेष रणनीति बनाई है। हरियाणा विधानसभा के लिए 90 में से 17 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। सो किसी भी राजनीतिक दल के 17 से कम अनुसूचित जाति के प्रत्याशी नहीं हो सकते। सामान्य सीटों पर दलितों को टिकट देने की अभी हरियाणा में कोई गंभीर परंपरा शुरु नहीं हुई है। बहरहाल इस बार हरियाणा विधानसभा में दलित प्रत्याशियों के वर्गीकरण का चलन जरूर शुरु हुआ है। हर राजनीतिक दल अपने दलित प्रत्याशियों का वर्गीकरण कर रहा है। पहली बार राजनीतिक दलों ने गैर चर्मकार जातियों को भी तवज्जो दी है। इस बार राजनीति दलों ने दलितों की तरह राजनीतिक दलों ने प्रत्याशी चयन में पिछड़ा वर्ग का कार्ड भी खेला है। पिछड़ा वर्ग को सबसे अधिक टिकटें भाजपा ने दी हैं। भाजपा ने 19 प्रत्याशी पिछड़ा वर्ग से उतारे हैं। इनेलो ने इस बार पिछड़ा वर्ग को 16 टिकट, हजकां ने 15 टिकट और कांग्रेस ने 13 टिकटें दी हैं। हर पार्टी में पिछड़ा वर्ग की अहीर, सैनी, कांबोज व गुर्जर जातियों को ही टिकट दी हैं। कुम्हार व जांगिड़ आदि को कोई कोई टिकट ही दी गई है। हरियाणा के मेवात क्षेत्र में मुस्लिमों को टिकटें देने का चलन हैं। इनेलो ने सबसे अधिक चार मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं जबकि कांग्रेस ने 3, हजकां ने दो और भाजपा ने केवल एक ही मुस्लिम को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा ने सबसे अधिक वैश्य प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे हैं। भाजपा ने 7 वैश्यों को टिकटें दी हैं। हजकां ने 5 और कांग्रेस व इनेलो ने 4-4 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है।

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