इनेलो केगढ़ में कांग्रेस को ताकत बढ़ाने की चुनौती


कांग्रेस की पहली सूची आने के बाद विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान ने एकाएक गति पकड़ ली है। इनेलो अपना गढ़ सुरक्षित रखने की कवायद में जुटी है तो कांग्रेस के समक्ष अपना प्रदर्शन बेहतर करने की चुनौती है। सिरसा जिले में इंडियन नेशनल लोकदल व कांग्रेस के बीच वर्चस्व बरकरार रखने व छीनने की लड़ाई बनी हुई है। आंकड़ों के आइने में जिला के सभी पांचों विधानसभा हलकों को उतारें तो वर्ष 1982 से लेकर अब तक जिले के चार हलकों में लोकदल या इंडियन नेशनल लोकदल का ही दबदबा बना रहा है। हां यह अलग बात है कि जिला मुख्यालय अर्थात सिरसा विधानसभा सीट पर इस दल की दाल कम गली है। इस विधानसभा सीट से राष्ट्रीय दल कांग्रेस ने अपना वर्चस्व कायम रखा है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कांग्रेस सरकार के उद्योग मंत्री लक्ष्मण दास अरोड़ा यहां 1982 से ही अपना सिक्का जमाते रहे हैं। हालांकि 1982 में उन्होंने बतौर आजाद उम्मीदवार 30.61 फीसदी वोट लेकर अपनी जीत दर्ज की लेकिन वर्ष 1991, 2000 तथा 2005 में तीन बार बतौर कांग्रेस प्रत्याशी अपनी जीत दर्ज की। एक अकेली सिरसा विधानसभा सीट को अगर अपवाद मानकर चलें तो शेष चार विधानसभा सीटों ऐलनाबाद, डबवाली, दड़बा व रोड़ी में इंडियन नेशनल लोकदल का ही दबदबा देखा गया है। ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र में तो लोकदल या इंडियन नेशनल लोकदल के प्रत्याशियों ने वर्ष 1982 से अब तक पांच बार जीत हासिल की है। एक पहलू यह भी है कि इस विधानसभा सीट से भागीराम ने लोकदल या इनेलो के प्रत्याशी के रूप में चार बार चुनावी जीत का सेहरा अपने सिर बांधा है। उन्होंने 1982 व 1987 में लोकदल, 1996 में तत्कालीन समता पार्टी तथा वर्ष 2000 में इंडियन नेशनल लोकदल से विजय प्राप्त की। वर्ष 2005 में भी इनेलो की जीत का सिलसिला जारी रहा और यहां से डा. सुशील इंदौरा विजयी हुए। परिसीमन से पूर्व दड़बा कलां विधानसभा क्षेत्र से तो लोकदल या इंडियन नेशनल लोकदल ने चार बार विजयी पताका फहराई है जबकि कांग्रेस को महज दो बार जीत मिली है। यहां महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि इस हलके से इस दल की महिला प्रत्याशी विद्या बैनीवाल ने तीन बार जीत हासिल की है। वर्ष 1987 में उन्होंने बहादर सिंह को 30.06 फीसदी के मुकाबले 67.69 फीसदी मतों से पराजित किया। इसी तरह उन्होंने वर्ष 1996 तथा 2000 के विधानसभा चुनावों में क्रमश: प्रह्लाद सिंह व डा. केवी सिंह को पराजित कर वर्चस्व बरकरार रखा। डबवाली में भी लोकदल या इंडियन नेशनल लोकदल ने चार बार जबकि कांग्रेस ने दो बार विजय का वरण किया है। यहां से कांग्रेस की प्रत्याशी रही संतोष चौहान सारवान ने वर्ष 1991 में जनता पार्टी के ज्ञान चंद को पराजित किया। इंडियन नेशनल लोकदल ने यहां वर्ष 2000 तथा 2005 में लगातार जीत दर्ज की है। इससे पूर्व 1987 में लोकदल तथा 1996 में तत्कालीन समता पार्टी से मनीराम ने पार्टी को जीत दिलाई। जहां तक परिसीमन से पूर्व रोड़ी विधानसभा क्षेत्र के इतिहास का सवाल है तो यहां भी लोकदल, समता पार्टी या इनेलो के रूप में चार बार जीत हासिल हुई है। इनेलो सुप्रीमो ने 1996 से 2005 तक लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी।

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