पंडित जी..मोहे टिकट दिला दो


( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- हेलो..पंडित जी नमस्कार। मैं दिल्ली से बोल रहा हू्ं..आपने जो उपाय बताया था, मैंने कर दिया है। अपने हाथ में पुखराज भी पहन लिया है, थोड़ी देर पहले ही पार्टी की बैठक खत्म हुई है..अध्यक्ष और प्रभारी दोनों बैठक से बाहर आ चुके हैं..आज रात तक टिकट का फैसला हो जाएगा..मुझे लगता है, आपकी कृपा से टिकट तो मुझे ही मिलेगा..बस आप पर्चा भरने की तारीख और समय मुकर्रर कर दीजिए। जिस दिन आप कहेंगे, उसी दिन मैं पर्चा भरूंगा..और हां, आप चिंता नहीं करना। टिकट लेकर लौटते ही आपकी दक्षिणा भी डबल कर दूंगा..पंडित जी, नेटवर्क प्राब्लम है, आवाज साफ नहीं आ रही है..हेलो-हेलो-हेलो,..पंडित जी, कोई दूसरा उपाय करना है तो मुझे बता दो..बस किसी भी तरीके से टिकट मिलनी चाहिए। दिल्ली दरबार में टिकट की जंग लड़ रहे सभी पार्टियों के अधिकतर नेताओं का यही जुमला है। टिकट हासिल करने के लिए राजनेता आजकल अपनी-अपनी पसंद के ज्योतिषियों से सलाह-मशविरा कर रहे हैं। कुछ नेताओं को अपने पंडित की ज्योतिष विद्या पर इतना भरोसा है कि वह खुद घर बैठे हैं और उन्हें अपना नाम टिकट सूची में शामिल होने का पूरा यकीन है। ऐसे नेताओं की संख्या भी कम नहीं है, जिन्हें टिकट की जंग हारती हुई दिखाई पड़ रही है, मगर उन्होंने अभी तक अपना हौसला नहीं छोड़ा है। ऐसे राजनेता अपने ज्योतिषियों से कर्मकांड कराकर टिकट हासिल करने अथवा आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। प्रदेश में ज्योतिष विद्या का ज्ञान रखने वाले अधिकतर पंडित इस समय बिजी हैं। उनके मोबाइल पर आने वाली कॉल्स भी वेटिंग में चल रही हैं। कुछ नेता व्यक्तिगत रूप से मिलकर पंडितों से सलाह ले रहे हैं तो कुछ फोन पर ही काम चला रहे हैं। चुनाव लड़ने के इच्छुक इन नेताओं के ज्योतिषी हरियाणा से बाहर के राज्यों के भी हैं। दिल्ली, मुंबई, सहारनपुर, मेरठ और जयपुर में बैठे इन पंडितों से लगातार टिकट व नामांकन के बारे में सलाह ली जा रही है। जिन नेताओं को एक से अधिक पंडितों की राय पर भरोसा है, वह उसे क्रास चेक भी कर रहे हैं। ऐसे नेताओं की संख्या भी बहुत अधिक है, जिन्हें पार्टियां टिकट तो देना चाहती हैं, मगर उनके ग्रह उन्हें चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दे रहे हैं। ऐसे नेताओं का प्रयास है कि पार्टी द्वारा थोपे जाने वाले चुनाव लड़ने संबंधी आदेश को ज्योतिषीय उपाय के जरिए खारिज करा दिया जाए। कुछ नेता येन-केन-प्रकारेणकी नीति पर अमल करते हुए टिकट के लिए किसी भी उपाय से नहीं चूकना चाहते हैं। पंडितों द्वारा नेताओं को सोने व चांदी के आभूषणों में अलग-अलग तरह के रत्न धारण करने की सलाह भी दी जा रही है। चुनाव के इस मौसम में न केवल रत्नों का कारोबार बढ़ गया है बल्कि ज्योतिषियों की आमदनी में भी बढ़ोतरी हुई है।डबवाली के पर्सिद पत्रकार इकबाल शांत के अनुसार दिल्ली के एजेंटों से उन्हें जो सूचना मिली हैं, उसके मुताबिक हरियाणा, अरुणाचल और महाराष्ट्र में रत्नों की खपत बढ़ी है। इन तीनों राज्यों में चुनाव हो रहे हैं।

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