55 में सुलह, 35 पर कलह


( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- 55 में सुलह, 35 पर कलह : कांग्रेस की टिकटों को लेकर सबसे ज्यादा मारामारी मचने की आशंका जताई जा रही है लेकिन भीतर के नेताओं की मानें तो पार्टी के ज्यादातर टिकट पहले से ही तय हो चुके हैं। उन पर केवल अंतिम मुहर लगनी बाकी रह गई है। फिलहाल केंद्रीय नेतृत्व राज्य के नेताओं से बातचीत में व्यस्त है और पहली लिस्ट पितृ पक्ष के बाद आने की संभावना जताई जा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस काफी हॉट बनी हुई है। माना जा रहा था कि असेंबली चुनाव में गठजोड़ की राजनीति कांग्रेस को कड़ी टक्कर देने में कामयाब रहेगी लेकिन एक के बाद एक करके गांठें खुलने से विपक्ष की हालत दयनीय होकर रह गई है। हालत यह है कि कांग्रेस के अतिरिक्त किसी और दल में टिकट वितरण कोई मसला ही नहीं रह गया है। बाकी की मजबूरी है कि उपलब्ध विकल्पों में से ही बेहतरीन प्रत्याशी का चयन किया जाए। उधर, कांग्रेस में हर सीट पर चार से पांच बड़े नाम दावा ठोक रहे हैं। बाहरी नेताओं के पार्टी में धड़ाधड़ शामिल होने से भी टिकट की लड़ाई रोचक दौर में पहुंचती जा रही है। पिछली बार कांग्रेस 67 सीटों पर जीतकर आई थी। भजनलाल, गोहाना के धर्मपाल मलिक, इंद्री के राकेश कंबोज कांग्रेस से किनारा कर गए तो संख्या 64 पर आ गई। उप चुनाव में कांग्रेस आदमपुर के अलावा दो सीट फिर जीत गई और आंकड़ा 66 पर आ गया। लेकिन चुनाव आते-आते कांग्रेस के पास 63 विधायक ही रह गए। करतार देवी का निधन हुआ तो शादी लाल बत्रा राज्यसभा व जितेंद्र मलिक लोकसभा पहंुच गए। उनकी सीट खाली हैं। वहां से कांग्रेस को और कोई मजबूत उम्मीदवार तलाश करना पड़ रहा है। सूत्र कहते हैं कि कांग्रेस में टिकट के लिए माथापच्ची काफी पहले शुरू हो चुकी है। नेता टिकट के जुगाड़ के लिए हरियाणा के साथ दिल्ली में लाबिंग शुरू कर रहे हैं। जिनकी सीट परिसीमन में फंस गई वह अपने लिए नए हलके की तलाश में हैं तो सिटिंग एमएलए अपनी सीट बचाने की फिराक में हैं। इसके अतिरिक्त पिछली बार जो नेता चुनाव कम अंतर से हारे वह भी टिकट हासिल करने के लिए प्रयासरत हैं। सरकार में बतौर सलाहकार शामिल रहे एक नेता कहते हैं कि कांग्रेस में 55 सीटों पर शुरू से ही कोई विवाद नहीं है। वह कहते हैं कि चिंता का विषय वह 14 सीटें हैं जहां से कांग्रेस तीन से ज्यादा चुनाव लगातार हार चुकी है। उसके बाद वह सीटें हैं जहां पर पिछली बार पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। ऐसा नहीं है कि जो लोग चुनाव हारे थे उन सभी के टिकट काटे जाएंगे। अलबत्ता, जिनकी छवि अच्छी है और जो जोरदार टक्कर देकर हारे थे, उनके टिकट कटने की तुक नहीं है। उन जगहों पर चुनाव में ज्यादा मेहनत की जरूरत है। वह कहते हैं कि टिकट को लेकर मारामारी की बात विरोधी दल सबसे ज्यादा कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि बाहर से कांग्रेस में आए नेता टिकट के लिए हुड़दंग मचाएंगे। लेकिन इन नेताओं को पहले ही साफ कर दिया गया है कि टिकट मेरिट और निष्ठा पर मिलेगा। वह कहते हैं कि लगभग 10 से 12 निवर्तमान विधायकों का टिकट काटा जा सकता है। कुछ को शिफ्ट किया जा सकता है। लगातार हार चुकी14 सीट पर नए नाम लाए जा रहे हैं। एक दर्जन सीट परिसीमन में फंस रही हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी का पत्ता साफ हो गया। कद्दावर को दूसरी सीटों पर लड़ाया जाएगा। वह कहते हैं कि भीतरी-बाहरी, परिसीमन व जीत-हार के भंवर में फंसी 35 सीटों को लेकर मंथन चल रहा है। उनका कहना है कि पार्टी पहले दौर में 30 से 50 नामों की घोषणा पितृपक्ष के बाद कभी भी कर सकती है?

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