अकेले हैं मगर कोई गम नहीं, दम है,


डबवाली,( डॉ सुखपाल सावंत खेडा) पिछली बार की तरह एक बार फिर इनेलो हरियाणा के विधानसभा चुनाव में अकेले दम मैदान में उतर रही है। भाजपा ने पिछली बार सत्ता में साथ बने रहने के बाद चुनाव के ऐन मौके पर इनेलो से हाथ छुड़ा लिया था जबकि इस बार भी गठबंधन कर साथ चलने की हामी भरने के बाद चुनाव का ऐलान होने से पहले ही उसका साथ छोड़ दिया। मगर इस सबके बाद भी इनेलो ने इस सदमे से उबरकर अपने प्रचार को पूरी तरह जीवित रखा। इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला अपने प्रमुख नेताओं के साथ राज्यभर के निरंतर दौरे कर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भर रहे हैं। उनका कहना भी है कि कांग्रेस अपने हक में हवा के जो दावे कर रही है, वह जमीनी सच्चाई से कोसों दूर हैं। चंडीगढ़ में बैठकर पूरे हरियाणा की तस्वीर दिखाकर कांग्रेस लोगों को गुमराह कर रही है। गांवों-शहरों में जाकर देखें तो पता चलता है कि लोग बिजली-पानी, सड़क, स्वास्थ्य व शिक्षा की सभी मूलभूत सुविधाओं से कितने वंचित हैं। उन्होंने कहा कि इस बार इनेलो, भाजपा, हजकां, बसपा के अकेले-अकेले चुनाव लड़ने का सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को होगा क्योंकि सभी उसमें सेंध लगाएंगे जबकि इनेलो को अपने जनाधार पर पूरा भरोसा है जो पूरी तरह से एकजुट है। कांग्रेस को हकीकत का अहसास 18 के बाद हो जाएगा जब उसके उम्मीदवारों का ऐलान होगा। तब टिकट न मिलने से खफा कई बड़े कांग्रेसी नेता अन्य दलों की ओर रुख करेंगे या फिर पार्टी में रहकर अपने प्रत्याशी का खेल खराब करने में जुटेंगे। इनेलो ने सबसे पहले अपने करीब आधे प्रत्याशियों का ऐलान कर और पार्टी घोषणापत्र जारी करके अन्य दलों के मुकाबले बाजी मार ली है और चुनाव प्रचार में भी वह अन्य दलों से आगे चल रही है। जब तक कांग्रेस अपनी टिकटें बांटेगी, तब तक इनेलो प्रमुख चौटाला राज्य के हर हलके का एक दौरा मुकम्मल कर चुके होंगे जो रोजाना ही चार-पांच हलकों को छू रहे हैं। इनेलो के पास अजय-अभय की जोड़ी और पार्टी के अन्य सीनियर नेताओं की मजबूत टीम है और उसे कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान व मतभेदों का भी भरपूर लाभ मिलने की उम्मीद है। बकौल चौटाला जितने बड़े, सक्रिय व कर्मठ लीडर इनेलो में हैं उतने किसी अन्य दल में नहीं हैं। कांग्रेस के तो कई मौजूदा नेताओं ने अपनी राजनीति की शुरुआत उनके पिता चौ देवीलाल की रहनुमाई में की थी और उसके जो चार-पांच नेता खुद को वरिष्ठ मानते भी हैं, उनकी आपस में ही नहीं पटती। बसपा व भाजपा के प्रदेश में आधार से तो सभी वाकिफ हैं और उनके पास एक भी ऐसा नेता नहीं है जिसे प्रदेश स्तर का नेता कहा जा सके। हजकां में चौ भजनलाल और कुलदीप बिश्नोई के सिवाय और ऐसा नेता ढूंढे नहीं मिलेगा जिसकी पहचान पूरे प्रदेश में हो लेकिन हजकां का मकसद कुछ सीटें जीतकर दोबारा कांग्रेस में वापसी करने का है। ऐसे में केवल इनेलो ही है जिसके पास ऐसे नेताओं की लंबी फेहरिस्त है जो न केवल जनता में सक्रिय हैं बल्कि जिनकी पहचान पूरे प्रदेश में है।

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