असमय काल के गाल में समा गए रेड्डी

डबवाली(sukhpal) भारत में हादसों के कारण कई प्रतिभाशाली नेताओं की राजनैतिक पारी का असमय अंत हो गया, जिसमें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी भी है। आम जनता के नेता रेड्डी ने समाज में दबे कुचले और समाज के उपेक्षित तबके के सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के जरिए राजनीतिक में अलग स्थान बनाया था।
भारतीय राजनीति के इतिहास पर अगर नजर डाला जाएं तो कई दिग्गज नेताओं संजय गांधी, राजेश पायलट, माधव राव सिंधिया, जी एम सी बालयोगी, ओ पी जिंदल, साहिब सिंह वर्मा, सुरेंद्र सिंह जैसे कई प्रतिभाशाली राजनेता हादसों के चलते असमय काल के गाल में समा गए। इसी कड़ी में इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, ललित नारायण मिश्र, दीन दयाल उपाध्याय का नाम भी आता है जिनकी आतंकी हिंसा या रहस्यमय स्थिति में मौत हुई।
दुर्घटना का शिकार होने वाले नेताओं में महत्वपूर्ण नाम पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र एवं कांग्रेस नेता संजय गांधी का है जिनकी 29 वर्ष पहले दिल्ली के सफदरजंग हवाईअड्डे पर ग्लाइडर दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसी कड़ी में कांग्रेस के प्रतिभाशाली नेता राजेश पायलट आते है जिनकी 11 जून 2000 को जयपुर के पास सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पेशे से पायलट राजेश ने अपने मित्र राजीव गांधी की प्रेरणा से राजनीति में कदम रखा और राजस्थान के दौसा लोकसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए। पालयट एक महत्वपूर्ण गुर्जर नेता के रूप में उभर कर सामने आए थे। उनके नरसिंह राव सरकार में गृह राज्य मंत्री रहते हुए तांत्रिक चंद्रास्वामी को जेल भेजा गया था।
माधव राव सिंधिया एक और महत्वपूर्ण नाम है, जो असमय दुर्घटना का शिकार हुए। सिंधिया ने अपने राजनैतिक करियर की शुरूआत 1971 में की थी जब उन्होंने जनसंघ के सहयोग से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में गुना लोकसभा क्षेत्र से चुनाव में जीत दर्ज की थी।
बहरहाल, 1997 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए और 1984 में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी को ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र से पराजित किया। सिंधिया ने विभिन्न सरकारों में रेलमंत्री, नागर विमानन मंत्री और मानव संसाधन विकास मंत्री का दायित्व संभाला, लेकिन 30 सितंबर 2001 को विमान दुर्घटना में उनकी असमय मौत हो गई। तेदेपा नेता जी एम सी बालयोगी भी असमय दुर्घटना का शिकार हुए जब तीन मार्च 2002 को आंध्रप्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले के कैकालूर इलाके में उनका हेलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बालयोगी सबसे पहले 10वीं लोकसभा में तेदेपा के टिकट पर चुन कर आए। उन्हें 12वीं और 13वीं लोकसभा का अध्यक्ष चुना गया।
उद्योगपति तथा राजनेता ओ पी जिंदल भी दुर्घटना का शिकार होने से असमय भारतीय राजनीति के पटल से ओझल हो गए। जिंदल आर्गेनाइजेशन को उद्योग जगत की बुलंदियों पर पहुंचाने वाले ओ पी जिंदल हरियाणा के हिसार क्षेत्र से तीन बार विधानसभा के लिए चुने गए और उन्होंने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री का दायित्व भी संभाला। 31 मार्च 2005 को हेलीकाप्टर दुर्घटना में उनकी असमय मौत हो गई। भाजपा के प्रतिभावान नेता साहिब सिंह वर्मा का नाम भी इसी कड़ी में आता है। वर्ष 1996 से 1998 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले वर्मा 1999 से 2004 तक लोकसभा के सदस्य और केंद्रीय मंत्री भी रहे। भाजपा के उपाध्यक्ष पद का दायित्व संभालने वाले साहिब सिंह वर्मा की 30 जून 2007 को अलवर-दिल्ली राजमार्ग पर सड़क दुर्घटना में मौत हो गई।
इसी कड़ी में इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, ललित नारायण मिश्रा, दीन दयाल उपाध्याय का नाम भी आता है जिनकी आतंकी हिंसा या रहस्यमय परिस्थिति में मौत हुई। 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की अपने ही सुरक्षाकर्मियों ने हत्या कर दी थी। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी आतंकी हमले के शिकार हुए जब श्रीपेरम्बदूर में चुनावी सभा के दौरान लिट्टे आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी। हालांकि उधर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल, केंद्रीय मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और शैलजा उस समय बाल-बाल बच गए थे जब 2004 में गुजरात में खाणवेल के पास उन्हें ले जा रहे हेलीकाप्टर का पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था।

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